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रूस के तेल पर अमेरिका का दबाव, भारत के सामने ऊर्जा और व्यापार की बड़ी चुनौती

SHIDDHANT
18 Sept 2026 10:32 PM IST
रूस के तेल पर अमेरिका का दबाव, भारत के सामने ऊर्जा और व्यापार की बड़ी चुनौती
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टैरिफ की धमकी के बीच भारत की रणनीति पर सबकी नजर
Delhi दिल्ली: रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर भारत के सामने कूटनीतिक और आर्थिक चुनौती बढ़ती नजर आ रही है। अमेरिकी कांग्रेस में पेश नए प्रतिबंध विधेयक के बाद भारत पर दबाव बढ़ गया है। इस बिल में रूस से बड़े स्तर पर तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है और रूस से कच्चे तेल की खरीद में प्रमुख देशों में शामिल है। 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने रियायती दरों पर रूसी कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई थी, जिससे देश को ऊर्जा लागत में काफी बचत हुई। रिपोर्ट के अनुसार, अब यह ऊर्जा नीति भारत के लिए चुनौती बन गई है। अगर भारत रूसी तेल खरीद कम करता है तो घरेलू ईंधन कीमतों पर असर पड़ सकता है और सरकार के वित्तीय प्रबंधन पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं, अगर भारत अपनी खरीद जारी रखता है तो अमेरिका के साथ व्यापार संबंधों पर असर पड़ने की आशंका है।
अमेरिका के नए बिल पर भारत की प्रतिक्रिया
भारत ने अमेरिकी विधेयक पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। नई दिल्ली का कहना है कि देश की प्राथमिकता अपने 1.4 अरब नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है। भारत ने यह भी कहा है कि वह अलग-अलग स्रोतों से ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की नीति पर आगे बढ़ रहा है। भारत का कहना है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखना जरूरी है और किसी भी फैसले का असर केवल एक देश तक सीमित नहीं रहेगा।
व्यापार वार्ता पर असर की चिंता
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत पहले से जारी है। हालांकि, पिछले कुछ समय में दोनों देशों के बीच टैरिफ और व्यापार मुद्दों को लेकर मतभेद सामने आए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि रूस से तेल खरीद का मुद्दा ऐसे समय में सामने आया है जब दोनों देश व्यापार समझौते को लेकर बातचीत कर रहे हैं। संभावित अमेरिकी टैरिफ से भारतीय निर्यातकों पर असर पड़ने की चिंता भी जताई जा रही है। भारत ने हाल के समय में ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के साथ व्यापार समझौते किए हैं और कनाडा के साथ बातचीत आगे बढ़ा रहा है। ऐसे में नई दिल्ली अन्य बाजारों के साथ संबंध मजबूत करने पर भी ध्यान दे रहा है।
घरेलू राजनीति में भी मुद्दा बना मामला
रूस से तेल खरीद का मुद्दा भारत में राजनीतिक चर्चा का विषय भी बन गया है। विपक्ष ने सरकार से इस मामले में कड़ा रुख अपनाने की मांग की है। आने वाले समय में उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात समेत कुछ राज्यों में चुनाव होने हैं। ऐसे में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में किसी भी संभावित बदलाव को लेकर सरकार के सामने राजनीतिक चुनौती भी हो सकती है। भारत ने रूस से तेल खरीद को अपनी ऊर्जा जरूरतों से जोड़कर देखा है। अब अमेरिकी प्रतिबंध विधेयक के बाद भारत को ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार हितों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के बीच संतुलन बनाना होगा।
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